Yeh Kaisi Halat Kar Gye Tum - Poetry, Love Poetry in Hindi

Dur, Kuch Ish Tarah Gye Ho Tum,
Mujhme, Mujhse Jayda Rah Gye Ho Tum,


Tumahara Aese Jana Kis Kam Ka Raha?
Mujhe Bhi Kisi Kam Ka Nahi Kar Gye Ho Tum,


Mein Sajo Ke Rakh Sakta Tha Lamhe Jana ,
Magar, Naa Jane Kyun Ek Khatash Bhar Gye Ho Tum,


Mujh Par Ab Mera Khud Ka Jor Nahi Chalta,
Mere Har Ek Kone Mein Rah Gye Ho Tum,


Mohabbat Thi Tumse, Koi Gunah Thodi Tha,
Yeh Kaisi Halat Kar Gye Ho Tum?


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ये कैसी हालत कर गए तुम!

 

Love Poetry in Hindi


दूर, कुछ इस  तरह गए हो तुम ,
मुझमे, मुझसे ज्यादा रह गए हो तुम,


तुम्हारा ऐसे जाना किस काम का रहा?
मुझे भी किसी काम का नहीं कर गए हो तुम,


मैंने सजो के रख सकता था लम्हे जाना ,
मगर, ना जाने क्यूँ  एक खटाश भर गए हो तुम,


मुझ पर अब मेरा खुद का जोर नहीं चलता,
मेरे हर एक कोने में रह गए हो तुम ,


मोहब्बत थी तुमसे, कोई गुनाह थोड़ी था,
यह कैसी हालत कर गए हो तुम ?



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